“आनंद बक्शी साहब ने ऐसे पेशेवर प्रदर्शनकारियों के बारे में लिखा है, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। मैं इसमें यह और जोड़ना चाहता हूं कि कहने वाले अगर बेकार, बेकाम-काज के हो तो कहना ही काम बन जाता है।
लाएफ मे वही लोग चमत्कार करते हैं जिनके पास opsan नही होते
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